आर्य समाज हमेशा भाषा पर संयम रखे बिना सवाल में सवाल करता रहा है अब 1 नहीं उसको 108 जवाब देने हैं, मित्रों की आपसी बातचीत से पता चलता है कि प्रस्तुत पुस्तक का पहला एडिशन बहुत कामयाब रहा था उसकी सफलता पर एक अलग आर्टिकल लिखा जा सकता है, यह प्राविर्धत संस्करण है जिसमें कल और आजकल के समय की आवश्यकताओं का खयाल रखते हुए, आर्य समाज की किताबों से ही ली गयी बातों की समीक्षा करते हुए उन पर एक सौ आठ प्रश्न किए गए हैं, विषय सूची पर नजर डालेंगे तो समझ लेंगे कि प्रस्तुत पुस्तक में आर्य समाज के संबन्ध में छपी सभी पिछली किताबों से बहुत कुछ अलग हट के है http://islaminhindi.blogspot.in/2015/04/swami-dayanand-ji-ne-kiya-khoja-kiya.html
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