सत्य सामने आने के बाद मुझे अपनी भूल का अहसास हुआ कि मैं अनजाने में भ्रमित था और इसी कारण ही मैंने अपनी किताब 'इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास ' में आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा है जिसका मुझे हार्दिक खेद है । [लक्ष्मिशंकाराचार्य]
स्वामी लक्ष्मिशंकाराचार्य जी की पुस्तक ''इस्लाम आतंक ? या आदर्श'' 24 Quran ki aayton ka apne sawaal ka khud unka hi jawab idhar se padhen
http://siratalmustaqueem.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html
No comments:
Post a Comment