Sunday, 28 August 2016

महेंद्र पाल आर्य .......,,,,,.... हंसी आती है हजरत ए इनसान पर

महेंद्र पाल आर्य .......,,,,,....  
 हंसी आती है हजरत ए  इनसान  पर 
यूं ट्यूब पर एक वीडयो देखा इस में महेन्दर जी एक किताब का विमोचन कर रहे हैं ,वह कह रहे हैं की उन्हों ने यह किकाब उन के ताल्लुक़ से मेरी किताब के जवाब में है ,मैं ने उन की यह किताब नहीं देखी ,लेकिन उनके भाषण में जो बेतुकी बातें उन के द्वारा कही गई है ,उन्हें सुन कर फिर मुझे वही बात याद आगई जो मैं ने उन पर टिप्पणी कर ते होए कहा था की वह दर्जा दो के बच्चे जैसी बातें करते हैं ,आप भी उनकी बातें सुनये  और उनके दिमाग पर अपना सर धुन ये ,,,,,यह साहब पवित्र क़ुरआन की एक आयत का अर्थ जो इनका अपना घड़ा हुआ है  यों  करते हैं कि ,,,और फिर अल्लाह अर्श पर बैठ  गया ,फिर प्रशन  खड़ा करते हैं ,उनका प्रशन  है कि  ,अल्लाह बड़ा है या अर्श ?फिर कहते हैं कि ,अर्श बड़ा है तो तुम अल्लाहु अकबर अर्थात अल्लाह सब से बड़ा है क्यों कहते हो ?और अगर अल्लाह बड़ा हे तो वह छोटे अर्श पर कैसे आगया ,उनके इस प्र्शन  पर मुझे एक गंवार कहावत याद आरही है ,आप ने भी सुना होगा कि ,अक़्ल बड़ी या भेंस ,बस ऐसा ही इस दर्जो दो के बचे का भी यह प्र्शन है ,उसने अपने भाषण में एक प्र्शन और किया है ,वह क़ुरान की एक आयत पढता है जिम में अल्लाह कहता है की कि हमने सृष्टि को छः दिन में बनाया ,उस पर इन महाशय का प्रशन है कि दिन की पहचान सूर्य से होती है तो यह बताओ कि  सूर्य अगर पहले बनाया तो उसे रखा कहाँ और अगर सूर्य बाद में बनाया तो दिन की पहचान कैसे की ,वाह क्या बात है साहब पंडित ,मुझे फिर एक गंवार चुटकला याद आरहा है वह यह कि गाँव का एक लड़का शहर से ग्रेजुऎशन कर के अपने गावँ पहुंचा तो गॉँव मै उसकी पढाई के चरचे थे एक गाँवदी को सूजी कि क्यों न उसकी परीक्षा ली जाए ,तो वह उसके पास पहुंचा और ज़मीन पर आड़ी टेढ़ी लकीर बना कर कहने लगा कि बताओ यह क्या है ,अब बेचारे ग्रेजएट साहब खामोश हो रहे और कहने लगे कि चाचा आप ही बतादें कि यह क्या  है  ,गाँवदी बोला के बनते ग्रेजुएेट हो और इतनी सी बात का भी नहीं पता कि यह बैल का मूत  है ,,,,अब इस से ज़्यादा इस गरीब पंडित पर फिर कभी लिखूंगा 

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