Wednesday, 14 September 2016

सूर्य, चन्द्र और नक्षत्रों पर वेद और वैदिक आर्य?

सूर्य, चन्द्र और नक्षत्रों पर वेद और वैदिक आर्य?

इसकी पुष्टि एक दूसरे प्रमाण से भी होती है, जहाँ दयानन्द जी ने यह कल्पना कर डाली है कि सूर्य, चन्द्र और नक्षत्रादि सब पर मनुष्‍यादि गुज़र बसर कर रहे हैं और वहाँ भी इन्हीं चारों वेदों का पाठ किया जा रहा है। उन्होंने अपनी कल्पना की पुष्टि में ऋग्वेद (मं0 10, सू0 190) का प्रमाण भी दिया है-
‘जब पृथिवी के समान सूर्य, चन्द्र और नक्षत्र वसु हैं पश्चात उनमें इसी प्रकार प्रजा के होने में क्या सन्देह? और जैसे परमेश्वर का यह छोटा सा लोक मनुष्यादि सृष्टि से भरा हुआ है तो क्या ये सब लोक शून्‍य होंगे?’ (सत्यार्थ., अष्टम. पृ. 156)
(22) क्या यह मानना सही है कि ईश्वरोक्त वेद व सब विद्याओं को यथावत जानने वाले ऋषि द्वारा रचित साहित्य के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा और अन्य ग्रहों पर मनुष्‍य आबाद हैं और वे वहां वेदपाठ और हवन कर रहे हैं?
(23) चन्द्रमा पर कई वैज्ञानिक जाकर लौट आए हैं। सेटेलाइट के ज़रिये चन्द्रमा
के हर हिस्से के फ़ोटो ले लिए गए हैं। वहां अभी तक तोप और बन्दूक़ बनाने वाली कोई फ़ैक्ट्री क्यों नहीं मिल पाई?
(24) क्या सूर्य पर वेदपाठी आर्यों के रहने और तोप और बन्दूक़ें रखने की बात कहना पौराणिकों से बड़ी गप्प मारना नहीं कहलाएगा? 
    अतः सत्यार्थप्रकाश और ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका आर्य समाजियों के पुराण सिद्ध होते हैं।
पुस्तक युनिकोड में चार पार्ट में इधर भी है
 http://108sawal.blogspot.in/2015/04/swami-dayanand-ne-kiya-khoja-kiya-paya.html

1 comment:

  1. 1-पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ हैं
    इस्लामी मान्यता है कि अल्लाह ने पुरुषों को श्रेष्ठ और स्त्रियों को हर प्रकार से निकृष्ट बनाया है . इसलिए स्त्रियों को समान अधिकार नहीं दिए जा सकते ,क्योंकि कुरान में लिखा है ,
    -पुरुषों को स्त्रियों से ऊंचा दर्जा प्राप्त है " सूरा -बकरा 2 :228
    पुरुष स्त्रियों से श्रेष्ठ है , क्योंकि अल्लाह ने उनको बडाई दी है " सूरा निसा 4 :34

    2-औरतें अय्याशी का साधन
    इस्लाम स्त्रियों को मनुष्य नहीं , उपभोग की ऐसी वस्तु मानता है .पुरुष जिसका जैसा भी चाहे उपयोग कर सकता है . और दिल भर जाने पर बिना कारण ही औरत को तलाक नयी औरत ला सकता है .यह अल्लाह ने कहा है
    तुम्हारे लिए आजादी है कि, तुंम दो दो , तीन तीन और चार चार शादियाँ कर लो "सूरा -निसा 4 :3
    तुम जब चाहो अपनी औरतों को छोड़ कर दूसरी औरतें रख सकते हो " सूरा 4 :20
    तुम जब चाहो अपनी औरतों को तलाक दे सकते हो .तुम्हें अल्लाह ढेरों नयी औरतें दे देगा और रब के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है "सूरा -अत तहरीम 66 :5

    3-महिलाविरोधी अँधा कानून

    इस्लामी कानून के चलते स्त्रियों को न्याय कभी नहीं मिल सकता .जब तक कुरान में यह आयत रहेगी
    यदि औरतें व्यभिचार में पकड़ी जाएँ और अपने पक्ष में चार गवाह पेश न कर सकें , तो उनको घर में तब तक बंद रखो जब तक वह ( भूखों ) न मर जाएँ "
    सूरा -निसा 4 :15
    यदि स्त्रियाँ अश्लील काम करती पायी जाएँ तो उनको दोगुनी सजा दी जाये "सूरा -अहज़ाब 33 :30

    4-पत्नी को पीटना जायज है
    मुसलमान अपनी जनसंख्या बढ़ा कर विश्व पर राज्य करना चाहते है , और औरतों को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं .और यदि औरत सहवास से मना करती है . तो पुरषों को उसे मारने पीटने का अधिकार है ,यही कुरान और हदीस कहती हैं
    रसूल ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी औरत की पिटायी करता है , तो उस से इसके बारे में कोई सवाल नहीं किया जा सकता "
    अबू दाऊद -किताब 11 हदीस 2142
    तुम हाथों से एक कोई टहनी तोड़ लो .और उस से औरत की पिटाई करो " सूरा -साद 38 :44
    एक औरत रसूल के पास फरियाद लेकर गयी और बोली कि मेरा पति मुझे बिना बात पर ही बुरी तरह से मारता रहता है . उसने रसूल को अपने शरीर मार पीट के जख्म ,और त्वचा पर पड़े हुए नीले हरे सूजन के निशान भी दिखाए .लेकिन रसूल ने उसकी विनती पर कोई ध्यान नहीं दिया और हंसते हुए उस औरत से कहा जाओ उसी पति के पास वापिस जाओ . और उसकी वासना को संतुष्ट करो .यही मेरा निर्णय है ."
    सही बुखारी - जिल्द 7 किताब 72 हदीस 715
    आयशा ने कहा कि रसूल को मेरा बाहर जाकर किसी से मिलना पसंद नहीं था . और जब भी मैं किसी कारण से बाहर जाती थी ,तो वापिस आते ही रसूल मेरी छातियों पर इतनी जोर से घूंसे मारते थे कि मुझे कई दिनों तक दर्द होता रहता था "सही मुस्लिम -किताब 4 हदीस 2127
    आयशा और हफ्शा ने कहा कि रसूल के ससुर अबू बकर और उमर जब भी किसी बात से नाराज हो जाते थे , तो उनको बुरी तरह से पीटते थे. यह बात सुन कर रसूल बहुत खुश हुए " सही मुस्लिम -किताब 9 हदीस 3506
    5-स्त्रीशिक्षा का शत्रु इस्लाम
    इस्लाम चाहता है कि स्त्रियाँ सिर्फ घर के अन्दर रहकर नमाज पढ़ती रहें और बच्चे पैदा करती रहें .और आधुनिक शिक्षा से दूर रहें .क्योंकि यदि स्त्रियाँ शिक्षित हो जाएँगी तो इस्लाम की पोल खुल जाएगी .इसी डर से तालिबान ने मलाला नामकी लड़की को गोली मारी थी .इसके पीछे कुरान की यह आयत है ,
    स्त्रियाँ बस घर में रहें और सजधज न करें और नमाज पढ़ती रहें "सूरा -अहजाब 33 :33

    6-परिवार का शत्रु इस्लाम
    सभी धर्मों में परिवार के सभी सदस्यों का यथायोग्य आदर और सम्मान करने की शिक्षा दी गयी है . लेकिन इस्लाम परिवार के उन सभी लोगों को शत्रु मानने की शिक्षा देता है , जो रसूल की बेतुकी बातों का विरोध करते हों .
    हे ईमान वालो तुम अपने माँ बाप और भाइयों को अपना मित्र नहीं बनाना यदि वह मुसलमान नहीं बनते "सूरा -तौबा 9 :23
    तुम उन लोगों को अपना मित्र नहीं मानो , जो रसूल के विरोधी हों .चाहे वह उनके बाप ,बेटे , सगे भाई या घराने के लोग ही क्यों न हों "सूरा -मुजादिला 58 :22

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